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प्रशासनिक कुशलता और डिजिटल कार्य प्रणाली का प्रतीक
Delhi दिल्ली: प्रधानमंत्री आज अत्यंत भावपूर्ण और प्रेरणादायी कार्यक्रम के तहत ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन को राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि इस समर्पण का उद्देश्य 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को पूरा करना है और यह भवन भारत में प्रशासनिक कार्यकुशलता और पारदर्शिता के सशक्त आधार के रूप में काम करेंगे।
प्रधानमंत्री ने उद्घाटन के अवसर पर कहा कि यह भवन केवल एक शारीरिक संरचना नहीं हैं, बल्कि यह देशवासियों की सेवा और प्रशासनिक जिम्मेदारी के लिए समर्पण की भावना का प्रतीक हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि इन भवनों में अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली, सम्मेलन कक्ष और स्मार्ट कार्य सुविधा मौजूद हैं, जिससे सरकारी कामकाज और अधिक कुशल, पारदर्शी और जनता-केन्द्रित बन सके।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन भविष्य में प्रशासनिक निर्णयों और नीति निर्माण में एक नया आयाम जोड़ेंगे। उन्होंने इसे जनता और प्रशासन के बीच की दूरी कम करने, नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने का अवसर बताया।
कार्यक्रम में केंद्रीय अधिकारियों, प्रशासनिक पदाधिकारियों और मीडिया प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। प्रधानमंत्री ने कहा कि भवनों के माध्यम से जनता की अपेक्षाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और यह भवन नागरिकों की सेवा में नए मानक स्थापित करेंगे। विशेष रूप से यह आयोजन यह संदेश देता है कि सरकारी कार्यालय केवल सरकारी कामकाज के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और जनता के कल्याण के लिए समर्पित होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इसे देश में समर्पण, निष्ठा और सेवा की भावना के सशक्त प्रतीक के रूप में देखा।
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